राजनीति

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धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं से मिलीं प्रियंका, बोलीं- कानून को वापस लेने के अलावा कोई समाधान नहीं

08 Jan 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के कांग्रेस नेता राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 32 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। इसी बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी के आवास पर इन नेताओं से मुलाकात की। पंजाब कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने मुलाकात की तस्वीरों को साझा किया है और लिखा कि प्रियंका गांधी ने धरने पर बैठे पार्टी नेताओं से मुलाकात की और किसानों की स्थिति पर चर्चा भी की।प्रियंका गांधी की कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रियंका गांधी यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि कानून को वापस लेने का अलावा कोई समाधान नहीं है।बता दें कि कांग्रेस की पंजाब इकाई ने किसानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया हुआ है। जिसमें वह किसानों से जुड़ी हुई समस्याओं और मुद्दों को साझा कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने #किसानकेलिएबोलेभारत नामक हैशटैग का इस्तेमाल किया है। कांग्रेस ने इस अभियान के साथ जुड़ने की अपील करते हुए एक तस्वीर साझा की थी। जिसमें लिखा है, 'जुड़िए #किसान_के_लिए_बोले_भारत अभियान से, भारत के लोग मांग करते हैं कि भाजपा सरकार किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें।'किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार कांग्रेस केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। हाल ही में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सर्दी की भीषण बारिश में टेंट की टपकती छत के नीचे जो बैठे हैं सिकुड़-ठिठुर कर, वो निडर किसान अपने ही हैं, ग़ैर नहीं। सरकार की क्रूरता के दृश्यों में अब कुछ और देखने को शेष नहीं।वहीं, महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार एक तरफ तो किसानों को बातचीत के लिए बुलाती है, दूसरी तरफ इस कड़कड़ाती ठंड में उन पर आंसू गैस के गोले बरसा रही है। इसी अड़ियल और क्रूर व्यवहार की वजह से अब तक लगभग 60 किसानों की जान जा चुकी है।



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किसान संगठन का ऐलान, मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दिल्ली की तरफ निकालेंगे ट्रैक्टर परेड

02 Jan 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। सरकार के साथ अगले दौर की वार्ता से पहले अपने रुख को और सख्त करते हुए प्रदर्शनकारी किसानों के संगठनों ने शनिवार को कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा होगा, तब दिल्ली की ओर ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी। उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन राष्ट्रीय राजधानी में होंगे और गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर होने वाली परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि उनकी प्रस्तावित परेड ‘ किसान परेड’ के नाम से होगी और यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद शुरू होगी।गौरतलब है कि सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के बीच अगले दौर की वार्ता चार जनवरी को प्रस्तावित है। संगठनों ने कहा शुक्रवार को कहा था कि अगर गतिरोध दूर करने के लिए होने वाली बैठक असफल होती है तो उन्हें ठोस कदम उठाना होगा। स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का किसानों की 50 प्रतिशत मांगों को स्वीकार करने का दावा ‘सरासर झूठ’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अब तक लिखित में कुछ नहीं मिला है।’’ उल्लेखनीय है कि गत बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच प्रस्तावित बिजली विधेयक एवं पराली जलाने पर जुर्माना के मुद्दे पर कथित तौर पर सहमति बनी थी, लेकिन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘‘पिछली बैठक में हमने सरकार से सवाल किया कि क्या वह 23 फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘नहीं। फिर आप देश की जनता को क्यों गलत जानकारी दे रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अबतक हमारे प्रदर्शन के दौरान करीब 50 किसान ‘शहीद’ हुए हैं।’’ गौरतलब है कि दिल्ली की सीमा पर तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों किसान कड़ाके की सर्दी के बावजूद गत 37 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि नए कानून से मंडी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और वे उद्योगपतियों की दया पर आश्रित हो जाएंगे।



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मुस्लिमों के नाम पर सड़कों का नामकरण, बीजेपी सांसद ने बताया टू नेशन थ्योरी वाली सोच

01 Jan 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

भारतीय जनता पार्टी के सांसद तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु की सड़कों का नामकरण मुस्लिमों के नाम पर करने को लेकर आपत्ति जताई है। तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु महानगरपालिका के आयुक्त को पत्र लिखकर इस मामले पर विचार करने को कहा है। इसके साथ ही बीजेपी सांसद ने सड़कों के नामकरण के कदम को द्विराष्ट्र की सोच वाला सांप्रदायिक सिद्धांत बताया। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट करते हुए कहा कि मेरे संज्ञान में आया है कि बेंगलुरु महानगरपालिका ने पदारायणपुरा के वार्ड नंबर 135 की कई सड़कों का नाम कुछ हस्तियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। महानगरपालिका ने केवल मुस्लिमों के नाम दिए हैं। तेजस्वी सूर्या ने सड़कों के नामकरण करने को टू नेशन थ्योरी वाली सोच बताया। साथ ही तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कि ये उसी तरह की सांप्रदायिक सोच है, जब मुस्लिम लीग ने हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची की मांग की थी। बीजेपी सांसद ने कहा कि देश में गैर मुस्लिम महापुरुषों और देशभक्तों की कमी नहीं है और उन्हीं के नामों पर सड़कों का नामकरण होना चाहिए। बीबीएमपी को लिखे पत्र में सूर्या ने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।



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नगर निगम के बकाया राशि को लेकर केजरीवाल के घर के बाहर गौतम गंभीर, मनोज तिवारी समेत बीजेपी नेताओं ने दिया धरना

09 Dec 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर भाजपा शासित नगर निगमों के महापौरों और नेताओं द्वारा जारी अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा और इसमें पार्टी के सांसद मनोज तिवारी और गौतम गंभीर ने भी भाग लिया। दिल्ली के तीन नगर निगमों-उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली, के महापौर जयप्रकाश, अनामिका मिथिलेश और निर्मल जैन कई महिला पार्षदों के साथ सोमवार से केजरीवाल के फ्लैगस्टाफ रोड स्थित आवास के बाहर धरना दे रहे हैं। ये सभी दिल्ली सरकार से 13000 करोड़ रुपये की बकाया धनराशि के भुगतान की मांग कर रहे हैं। धरने में शामिल हुए सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “हालांकि केजरीवाल खुद को आम आदमी कहते हैं, लेकिन वह मूल रूप से आम आदमी के खिलाफ हैं। यही कारण है कि उनकी सरकार ने नगर निगमों को 13000 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं किया है जबकि इस राशि सेसफाई कर्मियों, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने में मदद मिलती।” दिल्ली भाजपा अध्यक्ष अवधेश गुप्ता ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री संवेदनशील होते तो वह उन निगमों को बकाया भुगतान करते जिनके कर्मचारी कोरोना योद्धाओं के रूप में महामारी से लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे पहले भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी और प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन कर रहे नगर निगम के नेताओं से मुलाकात की थी और विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। केजरीवाल सहित आप नेताओं ने भाजपा द्वारा शासित तीन नगर निगमों में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का आरोप लगाया है और दावा किया है कि समस्त देय धनराशि का निगमों को जारी की जा चुकी है।



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राहुल गांधी ने लगाया आरोप, कहा- प्रधानमंत्री के अहंकार ने जवान को किसान के खिलाफ खड़ा किया

28 Nov 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली पहुंचने से रोके जाने के प्रयास को लेकर शनिवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार’ ने जवान को किसान के खिलाफ खड़ा कर दिया है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने दावा किया कि दिल्ली आने वाले पूंजीपतियों के लिए लाल कालीन बिछाई जाती है, जबकि किसानों के आने पर रास्ते खोदे जा रहे हैं। राहुल गांधी ने एक सुरक्षाकर्मी द्वारा किसान पर लाठी भांजने संबंधी एक तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘बड़ी ही दुखद फ़ोटो है। हमारा नारा तो ‘जय जवान जय किसान’ का था लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया। यह बहुत ख़तरनाक है।’’

प्रियंका गांधी ने ट्वीट के माध्यम से दावा किया, ‘‘भाजपा सरकार में देश की व्यवस्था को देखिए जब भाजपा के खरबपति मित्र दिल्ली आते हैं तो उनके लिए लाल कालीन डाली जाती है। मगर किसानों के लिए दिल्ली आने के रास्ते खोदे जा रहे हैं।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘दिल्ली किसानों के खिलाफ कानून बनाए वह ठीक, मगर सरकार को अपनी बात सुनाने किसान दिल्ली आए तो वह गलत?’’ उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे किसानों को शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल होने की अनुमति दे दी गई और वे बुराड़ी के मैदान में प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे पहले हरियाणा में कई स्थानों पर पुलिस ने किसानों को रोकने के प्रयास के तहत पानी की बौछार और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।बड़ी ही दुखद फ़ोटो है। हमारा नारा तो ‘जय जवान जय किसान’ का था लेकिन आज PM मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया।



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चीन के साथ जारी तनातनी के बीच बोले PM मोदी, संप्रभुता पर आंख उठाने वालों को देश और सेना ने उन्हीं की भाषा में दिया जवाब

15 Aug 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव के बीच शनिवार को कहा कि भारत की संप्रभुता का सम्मान सर्वोपरि है और जिसने भी इस पर आंख उठाई, देश व देश की सेना ने उसे उसकी ही में जवाब दिया। देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने चीन का नाम लिए बगैर कहा कि संप्रभुता के सम्मान के लिए देश व उसके जवान क्या कर सकते हैं, यह दुनिया ने लद्दाख में हाल ही में देखा। उन्होंने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी की में जवाब दिया है।’’मोदी ने कहा, ‘‘भारत की संप्रभुता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है। इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है, ये लद्दाख में दुनिया ने देखा है।’’ प्रधानमंत्री ने गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आतंकवाद हो या विस्तारवाद, भारत आज इनका डटकर मुकाबला कर रहा है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में भारत को 192 में से 184 देशों के मिले समर्थन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह दर्शाता है कि आज दुनिया का भारत पर विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘विश्व के 192 में से 184 देशों का भारत को समर्थन मिलना हर हिंदुस्तानी के लिए गर्व की बात है। विश्व में कैसे हमने अपनी पहुंच बनाई है यह उसका उदाहरण है। यह तभी संभव होता है जब भारत खुद मजबूत हो, भारत सशक्त हो, भारत सुरक्षित हो।’’ मोदी ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों के साथ चाहे वे हमसे जमीन से जुड़े हों या समंदर से, हम अपने संबंधों को और विश्वास के साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का लगातार प्रयास है कि अपने पड़ोसी देशों के साथ अपने सदियों पुराने सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रिश्तों को और गहराई दे।’’ उन्होंने दक्षिण एशिया के देशों का आह्वान करते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र में जितनी शांति होगी, जितना सौहार्द्र होगा,वह मानवता के काम आएगा। उन्होंने कहा, ‘‘पूरी दुनिया का हित इसमें समाहित है।



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भारतीय भाषा और संस्कृति में तिलक का विश्वास नई शिक्षा नीति में झलकता है: अमित शाह

01 Aug 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का विश्वास हाल ही में जारी नई शिक्षा नीति में झलकता है। ‘लोकमान्य तिलक- स्वराज से आत्मनिर्भर भारत तक’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के माध्यम से तिलक के विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में भारत, भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं के तिलक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। शाह ने कहा, ‘‘भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति में लोकमान्य तिलक का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नयी शिक्षा नीति में झलकता है।’’

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति, 2020 को मंजूरी दी थी जिसमें स्कूली और उच्च शिक्षा में आमूल-चूल बदलाव के प्रावधान हैं। लोकमान्य तिलक की सौवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने यहां वेबिनार का आयोजन किया। शाह ने कहा कि तिलक का प्रसिद्ध सूत्रवाक्य था कि सच्चे राष्ट्रवाद की बुनियाद संस्कृति और परंपराओं की आधारशिलाओं पर रखी होती है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी सुधार यदि हमारे अतीत की अनदेखी करता है या उसका अपमान करता है तो सच्चे राष्ट्रवाद को समझने में मदद नहीं मिल सकती।’’ गृह मंत्री ने कहा कि तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सच्चे अर्थों में पूर्णता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई थी और इसमें बेजोड़ योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि तिलक का यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा ‘‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे पाकर रहूंगा।’’ शाह ने कहा कि तिलक के इस नारे ने भारतीय समाज में जागरण किया और स्वतंत्रता संघर्ष को जन आंदोलन बना दिया जिसकी वजह से उनका नाम लोकमान्य तिलक पड़ गया। उन्होंने कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति के गौरवपूर्ण इतिहास को जानना है तो तिलक के लेखन को समझना होगा। उनकी साहित्यिक कृतियों को पढ़ने से युवाओं को उनके महान व्यक्तित्व का ज्ञान होगा। कामकाजी वर्ग को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में तिलक के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि तिलक ने लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने के लिए शिवाजी जयंती और गणेशोत्सव मनाना शुरू किया था जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा ही बदल दी।



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सीमा पर विवाद और भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहुल गाधी ने फिर बोला भाजपा सरकार पर हमला

19 Jul 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को भाजपा पर हमला करते हुए उस पर कोविड-19 से होने वाली मौतों, जीडीपी के आंकड़ों और सीमा पर चीनी आक्रमण को लेकर संस्थागत तौर पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। कोविड-19 के कारण होने वाली मौत के मामलों में वृद्धि होने पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि यह भ्रम टूटने पर भारत को इसकी कीमत चुकानी होगी। वहीं, राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आरोप लगाया कि गांधियों ने दशकों तक जो भ्रम फैलाया, भारत को उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कांग्रेस नेता पर देश के लिए बीमार रहने की कामना करने का भी आरोप लगाया।गांधी ने एक ट्वीट में कहा, भाजपा झूठ को संस्थागत तौर पर फैला रही है। पहला, कोविड-19 टेस्ट पर बाधाएं लगायीं और मृतकों की संख्या गलत बतायी। दूसरा, जीडीपी के लिए एक नई गणना पद्धति लागू की। तीसरा, चीनी आक्रमण पर पर्दा डालने के लिए मीडिया को डराया। ये भ्रम जल्द ही टूट जाएगा और देश को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।उन्होंने अपने ट्वीट के साथ कोरोना वायरस की स्थिति से जुड़ी एक खबर को भी साझा किया। गांधी के आरोप की प्रतिक्रिया में शेखावत ने एक ट्वीट में कहा, गांधियों ने दशकों तक जो भ्रम फैलाया, भारत को उसकी बडी कीमत चुकानी पड़ी। देश के लिए बीमारी की आपकी कामना तिरस्कार योग्य है।



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पीएम केयर्स में रुपये देने वालों का खुलासा क्यों नहीं करना चाहते प्रधानमंत्री: राहुल

11 Jul 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक खबर का हवाला देते हुए शनिवार को सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘पीएम केयर्स’ कोष में अनुदान देने वालों के नामों का खुलासा क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री उन लोगों के नामों का खुलासा क्यों नहीं करना चाहते जिन्होंने ‘पीएम केयर्स’ के लिए पैसा दिया है? हर कोई जानता है कि चीनी कंपनियों हुवेई, शाओमी, टिकटॉक और वन प्लस ने पैसे दिए। वह इस बारे में विवरण साझा क्यों नहीं कर रहे हैं?’’कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल ने ट्वीट कर दावा किया, ‘ न्यू इंडिया में जवाबदेही को वणक्कम! पीएम केयर्स फंड की जांच संसद की पीएसी नहीं कर सकती। इसकी जांच कैग नहीं कर सकता। इसके बारे नागरिकों को आरटीआई के तहत सवाल करने तक का अधिकार नहीं। उन्होंने कटाक्ष करने के साथ ही आरोप लगाया, ‘‘मोदी जी का नारा है कि कभी कोई हिसाब नहीं दूंगा !’’राहुल गांधी और रणदीप सुरजेवाला ने जिस खबर का हवाला दिया उसमें दावा किया गया है कि लोक लेखा समिति (पीएसी) ‘पीएम केयर्स’ की छानबीन नहीं करेगी क्योंकि भाजपा सांसदों के विरोध के चलते पीएसी की बैठक में इस मामले पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।



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कांग्रेस की शिकायत पर NHRC ने लिया संज्ञान, स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार को जारी किया नोटिस

11 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को कांग्रेस नेता अजय माकन की शिकायत का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। माकन ने आरोप लगाए थे कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 रोगियों के लिए बेडों की कमी है और पर्याप्त संख्या में जांच नहीं की जा रही है। आयोग ने एक बयान में कहा कि वह समझता है कि यह सरकारी एजेंसियों, अस्पतालों, डॉक्टरों के साथ-साथ रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक अप्रत्याशित स्थिति है, लेकिन राज्य हरसंभव प्रयास किए बिना अपने नागरिकों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी किए गए हैं।आयोग ने एक बयान में कहा कि शिकायतकर्ता दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए हैं, बल्कि अपनी शिकायत के समर्थन में आंकड़े भी मुहैया कराए हैं। बयान में कहा गया है कि अगर ये आरोप सही हैं तो आम जनता की दुर्दशा के प्रति सरकारी एजेंसियों के अनुचित दृष्टिकोण का गंभीर मुद्दा उठाती हैं जो मानवाधिकार के गंभीर हनन के समान है। आंकड़े संकेत देते हैं कि सरकारी एजेंसियों को तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।बयान में कहा गया है कि आरोप है कि महामारी के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार में काफी देरी की गई है। नोटिस जारी करते हुए आयोग ने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों एक-दूसरे के परामर्श से दस दिनों में व्यापक रिपोर्ट देने के लिए मामले पर विचार करें। आयोग ने कहा कि इस दौरान दिल्ली सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह कोविड-19 के मरीजों के लिए बेडों की संख्या बढ़ाए और एक दिन में की जाने वाली जांचों की संख्या में भी इजाफा करे।



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